महाभारत 12.101.5
अमित्रा एव राजानं भेदेनोपचरन्त्युततां राजा निकृतिं जानन्यथामित्रान्प्रबाधते
amitrā eva rājānaṃ bhedenopacarantyutatāṃ rājā nikṛtiṃ jānanyathāmitrānprabādhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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