महाभारत 12.102.8
मृगस्वरा द्वीपिनेत्रा ऋषभाक्षास्तथापरेप्रवादिनः सुचण्डाश्च क्रोधिनः किंनरीस्वनाः
mṛgasvarā dvīpinetrā ṛṣabhākṣāstathāparepravādinaḥ sucaṇḍāśca krodhinaḥ kiṃnarīsvanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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