महाभारत 12.104.32तथा विविधशीलानामपि संभव उच्यतेयतेत योगमास्थाय मित्रामित्रानवारयन्tathā vividhaśīlānāmapi saṃbhava ucyateyateta yogamāsthāya mitrāmitrānavārayanइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें