महाभारत 12.105.5
अन्यत्र मरणात्स्तेयादन्यत्र परसंश्रयात्क्षुद्रादन्यत्र चाचारात्तन्ममाचक्ष्व सत्तम
anyatra maraṇātsteyādanyatra parasaṃśrayātkṣudrādanyatra cācārāttanmamācakṣva sattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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