महाभारत 12.105.50अपि मूलफलाजीवो रमस्वैको महावनेवाग्यतः संगृहीतात्मा सर्वभूतदयान्वितःapi mūlaphalājīvo ramasvaiko mahāvanevāgyataḥ saṃgṛhītātmā sarvabhūtadayānvitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें