महाभारत 12.109.15
दशैव तु सदाचार्यः श्रोत्रियानतिरिच्यतेदशाचार्यानुपाध्याय उपाध्यायान्पिता दश
daśaiva tu sadācāryaḥ śrotriyānatiricyatedaśācāryānupādhyāya upādhyāyānpitā daśa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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