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महाभारत 12.110.3
किं स्वित्सत्यं किमनृतं किं स्विद्धर्म्यं सनातनम्कस्मिन्काले वदेत्सत्यं कस्मिन्कालेऽनृतं वदेत्
kiṃ svitsatyaṃ kimanṛtaṃ kiṃ sviddharmyaṃ sanātanamkasminkāle vadetsatyaṃ kasminkāle'nṛtaṃ vadet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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