महाभारत 12.111.2
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
आश्रमेषु यथोक्तेषु यथोक्तं ये द्विजातयःवर्तन्ते संयतात्मानो दुर्गाण्यतितरन्ति ते
āśrameṣu yathokteṣu yathoktaṃ ye dvijātayaḥvartante saṃyatātmāno durgāṇyatitaranti te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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