महाभारत 12.112.22न शक्यमनमात्येन महत्त्वमनुशासितुम्दुष्टामात्येन वा वीर शरीरपरिपन्थिनाna śakyamanamātyena mahattvamanuśāsitumduṣṭāmātyena vā vīra śarīraparipanthināइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें