महाभारत 12.113.11
अथ शीतपरीताङ्गो जम्बुकः क्षुच्छ्रमान्वितःसदारस्तां गुहामाशु प्रविवेश जलार्दितः
atha śītaparītāṅgo jambukaḥ kṣucchramānvitaḥsadārastāṃ guhāmāśu praviveśa jalārditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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