महाभारत 12.113.14
यावदूर्ध्वमधश्चैव ग्रीवां संक्षिपते पशुःतावत्तेन सदारेण जम्बुकेन स भक्षितः
yāvadūrdhvamadhaścaiva grīvāṃ saṃkṣipate paśuḥtāvattena sadāreṇa jambukena sa bhakṣitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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