महाभारत 12.113.4
जातिस्मरो महानुष्ट्रः प्राजापत्ययुगोद्भवःतपः सुमहदातिष्ठदरण्ये संशितव्रतः
jātismaro mahānuṣṭraḥ prājāpatyayugodbhavaḥtapaḥ sumahadātiṣṭhadaraṇye saṃśitavrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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