महाभारत 12.113.7
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
एवमस्त्विति चोक्तः स वरदेन महात्मनाप्रतिलभ्य वरं श्रेष्ठं ययावुष्ट्रः स्वकं वनम्
evamastviti coktaḥ sa varadena mahātmanāpratilabhya varaṃ śreṣṭhaṃ yayāvuṣṭraḥ svakaṃ vanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें