महाभारत 12.114.8
तिष्ठन्त्येते यथास्थानं नगा ह्येकनिकेतनाःततस्त्यजन्ति तत्स्थानं प्रातिलोम्यादचेतसः
tiṣṭhantyete yathāsthānaṃ nagā hyekaniketanāḥtatastyajanti tatsthānaṃ prātilomyādacetasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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