महाभारत 12.115.6
श्लाघन्नश्लाघनीयेन कर्मणा निरपत्रपःउपेक्षितव्यो दान्तेन तादृशः पुरुषाधमः
ślāghannaślāghanīyena karmaṇā nirapatrapaḥupekṣitavyo dāntena tādṛśaḥ puruṣādhamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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