महाभारत 12.117.2
अस्यैवार्थस्य सदृशं यच्छ्रुतं मे तपोवनेजामदग्न्यस्य रामस्य यदुक्तमृषिसत्तमैः
asyaivārthasya sadṛśaṃ yacchrutaṃ me tapovanejāmadagnyasya rāmasya yaduktamṛṣisattamaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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