महाभारत 12.120.15
हन्यात्क्रुद्धानतिविषान्ये जिह्मगतयोऽहितान्नाश्रयेद्बालबर्हाणि सन्निवासानि वासयेत्
hanyātkruddhānativiṣānye jihmagatayo'hitānnāśrayedbālabarhāṇi sannivāsāni vāsayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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