महाभारत 12.120.32
यथा क्रमेण पुष्पेभ्यश्चिनोति मधु षट्पदःतथा द्रव्यमुपादाय राजा कुर्वीत संचयम्
yathā krameṇa puṣpebhyaścinoti madhu ṣaṭpadaḥtathā dravyamupādāya rājā kurvīta saṃcayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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