महाभारत 12.121.13
दण्डात्त्रिवर्गः सततं सुप्रणीतात्प्रवर्ततेदैवं हि परमो दण्डो रूपतोऽग्निरिवोच्छिखः
daṇḍāttrivargaḥ satataṃ supraṇītātpravartatedaivaṃ hi paramo daṇḍo rūpato'gnirivocchikhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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