महाभारत 12.121.26
दैवं पुरुषकारश्च मोक्षामोक्षौ भयाभयेहिंसाहिंसे तपो यज्ञः संयमोऽथ विषाविषम्
daivaṃ puruṣakāraśca mokṣāmokṣau bhayābhayehiṃsāhiṃse tapo yajñaḥ saṃyamo'tha viṣāviṣam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें