महाभारत 12.121.8
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
शृणु कौरव्य यो दण्डो व्यवहार्यो यथा च सःयस्मिन्हि सर्वमायत्तं स दण्ड इह केवलः
śṛṇu kauravya yo daṇḍo vyavahāryo yathā ca saḥyasminhi sarvamāyattaṃ sa daṇḍa iha kevalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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