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महाभारत 12.122.13
कथं क्षत्रियसंस्थश्च दण्डः संप्रत्यवस्थितःब्रूहि मे सुमहाप्राज्ञ ददाम्याचार्यवेतनम्
kathaṃ kṣatriyasaṃsthaśca daṇḍaḥ saṃpratyavasthitaḥbrūhi me sumahāprājña dadāmyācāryavetanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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