महाभारत 12.122.50
प्रजा जाग्रति लोकेऽस्मिन्दण्डो जागर्ति तासु चसर्वसंक्षेपको दण्डः पितामहसमः प्रभुः
prajā jāgrati loke'smindaṇḍo jāgarti tāsu casarvasaṃkṣepako daṇḍaḥ pitāmahasamaḥ prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें