महाभारत 12.122.55
इति ते सर्वमाख्यातं यो दण्डो मनुजर्षभनियन्ता सर्वलोकस्य धर्माक्रान्तस्य भारत
iti te sarvamākhyātaṃ yo daṇḍo manujarṣabhaniyantā sarvalokasya dharmākrāntasya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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