महाभारत 12.124.37
एतत्पृथिव्याममृतमेतच्चक्षुरनुत्तमम्यद्ब्राह्मणमुखे कव्यमेतच्छ्रुत्वा प्रवर्तते
etatpṛthivyāmamṛtametaccakṣuranuttamamyadbrāhmaṇamukhe kavyametacchrutvā pravartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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