महाभारत 12.124.49
धर्मं प्रह्राद मां विद्धि यत्रासौ द्विजसत्तमःतत्र यास्यामि दैत्येन्द्र यतः शीलं ततो ह्यहम्
dharmaṃ prahrāda māṃ viddhi yatrāsau dvijasattamaḥtatra yāsyāmi daityendra yataḥ śīlaṃ tato hyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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