महाभारत 12.124.68
एतद्विदित्वा तत्त्वेन शीलवान्भव पुत्रकयदीच्छसि श्रियं तात सुविशिष्टां युधिष्ठिरात्
etadviditvā tattvena śīlavānbhava putrakayadīcchasi śriyaṃ tāta suviśiṣṭāṃ yudhiṣṭhirāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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