महाभारत 12.126.41
एकपुत्रः पिता पुत्रे नष्टे वा प्रोषिते तथाप्रवृत्तिं यो न जानाति साशा कृशतरी मया
ekaputraḥ pitā putre naṣṭe vā proṣite tathāpravṛttiṃ yo na jānāti sāśā kṛśatarī mayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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