महाभारत 12.126.44
राजोवाचप्रसादये त्वा भगवन्पुत्रेणेच्छामि संगतिम्वृणीष्व च वरं विप्र यमिच्छसि यथाविधि
rājovācaprasādaye tvā bhagavanputreṇecchāmi saṃgatimvṛṇīṣva ca varaṃ vipra yamicchasi yathāvidhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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