महाभारत 12.126.50
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
स तत्रोक्तो महाराज ऋषभेण महात्मनासुमित्रोऽपनयत्क्षिप्रमाशां कृशतरीं तदा
sa tatrokto mahārāja ṛṣabheṇa mahātmanāsumitro'panayatkṣipramāśāṃ kṛśatarīṃ tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें