महाभारत 12.133.10
तं बहूनि सहस्राणि ग्रामणित्वेऽभिवव्रिरेनिर्मर्यादानि दस्यूनां निरनुक्रोशकारिणाम्
taṃ bahūni sahasrāṇi grāmaṇitve'bhivavrirenirmaryādāni dasyūnāṃ niranukrośakāriṇām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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