महाभारत 12.136.128
एवमुक्तः परं सान्त्वं मार्जारेण स मूषकःउवाच परमार्थज्ञः श्लक्ष्णमात्महितं वचः
evamuktaḥ paraṃ sāntvaṃ mārjāreṇa sa mūṣakaḥuvāca paramārthajñaḥ ślakṣṇamātmahitaṃ vacaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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