महाभारत 12.136.144
ब्रवीति मधुरं कंचित्प्रियो मे ह भवानितितन्मिथ्याकरणं सर्वं विस्तरेणापि मे शृणु
bravīti madhuraṃ kaṃcitpriyo me ha bhavānititanmithyākaraṇaṃ sarvaṃ vistareṇāpi me śṛṇu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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