महाभारत 12.136.182
इति संस्तूयमानो हि मार्जारेण स मूषकःमनसा भावगम्भीरं मार्जारं वाक्यमब्रवीत्
iti saṃstūyamāno hi mārjāreṇa sa mūṣakaḥmanasā bhāvagambhīraṃ mārjāraṃ vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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