महाभारत 12.136.199
एवं मत्वा महाराज शास्त्रार्थमभिगम्य चअभियुक्तोऽप्रमत्तश्च प्राग्भयाद्भीतवच्चरेत्
evaṃ matvā mahārāja śāstrārthamabhigamya caabhiyukto'pramattaśca prāgbhayādbhītavaccaret
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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