महाभारत 12.136.206
शत्रुसाधारणे कृत्ये कृत्वा संधिं बलीयसासमागमं चरेद्युक्त्या कृतार्थो न च विश्वसेत्
śatrusādhāraṇe kṛtye kṛtvā saṃdhiṃ balīyasāsamāgamaṃ caredyuktyā kṛtārtho na ca viśvaset
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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