महाभारत 12.136.2
तदिच्छामि परां बुद्धिं श्रोतुं भरतसत्तमयथा राजन्न मुह्येत शत्रुभिः परिवारितः
tadicchāmi parāṃ buddhiṃ śrotuṃ bharatasattamayathā rājanna muhyeta śatrubhiḥ parivāritaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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