महाभारत 12.136.32
शाखागतमरिं चान्यदपश्यत्कोटरालयम्उलूकं चन्द्रकं नाम तीक्ष्णतुण्डं क्षपाचरम्
śākhāgatamariṃ cānyadapaśyatkoṭarālayamulūkaṃ candrakaṃ nāma tīkṣṇatuṇḍaṃ kṣapācaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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