महाभारत 12.136.37
गतं हि सहसा भूमिं नकुलो मां समाप्नुयात्उलूकश्चेह तिष्ठन्तं मार्जारः पाशसंक्षयात्
gataṃ hi sahasā bhūmiṃ nakulo māṃ samāpnuyātulūkaśceha tiṣṭhantaṃ mārjāraḥ pāśasaṃkṣayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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