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महाभारत 12.136.54
सतां साप्तपदं सख्यं सवासो मेऽसि पण्डितःसांवास्यकं करिष्यामि नास्ति ते मृत्युतो भयम्
satāṃ sāptapadaṃ sakhyaṃ savāso me'si paṇḍitaḥsāṃvāsyakaṃ kariṣyāmi nāsti te mṛtyuto bhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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