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महाभारत 12.136.55
न हि शक्नोषि मार्जार पाशं छेत्तुं विना मयाअहं छेत्स्यामि ते पाशं यदि मां त्वं न हिंससि
na hi śaknoṣi mārjāra pāśaṃ chettuṃ vinā mayāahaṃ chetsyāmi te pāśaṃ yadi māṃ tvaṃ na hiṃsasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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