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महाभारत 12.136.64
बुद्धिमान्वाक्यसंपन्नस्तद्वाक्यमनुवर्णयन्तामवस्थामवेक्ष्यान्त्यां साम्नैव प्रत्यपूजयत्
buddhimānvākyasaṃpannastadvākyamanuvarṇayantāmavasthāmavekṣyāntyāṃ sāmnaiva pratyapūjayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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