महाभारत 12.136.71
उदारं यद्भवानाह नैतच्चित्रं भवद्विधेविदितो यस्तु मार्गो मे हितार्थं शृणु तं मम
udāraṃ yadbhavānāha naitaccitraṃ bhavadvidhevidito yastu mārgo me hitārthaṃ śṛṇu taṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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