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महाभारत 12.136.72
अहं त्वानुप्रवेक्ष्यामि नकुलान्मे महद्भयम्त्रायस्व मां मा वधीश्च शक्तोऽस्मि तव मोक्षणे
ahaṃ tvānupravekṣyāmi nakulānme mahadbhayamtrāyasva māṃ mā vadhīśca śakto'smi tava mokṣaṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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