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महाभारत 12.136.84
अथ बन्धपरिक्लिष्टो मार्जारो वीक्ष्य मूषकम्छिन्दन्तं वै तदा पाशानत्वरन्तं त्वरान्वितः
atha bandhaparikliṣṭo mārjāro vīkṣya mūṣakamchindantaṃ vai tadā pāśānatvarantaṃ tvarānvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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