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महाभारत 12.136.99
यच्च किंचिन्मयाज्ञानात्पुरस्ताद्विप्रियं कृतम्न तन्मनसि कर्तव्यं क्षमये त्वां प्रसीद मे
yacca kiṃcinmayājñānātpurastādvipriyaṃ kṛtamna tanmanasi kartavyaṃ kṣamaye tvāṃ prasīda me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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