महाभारत 12.137.104स्वयं समुपजानन्हि पौरजानपदक्रियाःस सुखं मोदते भूप इह लोके परत्र चsvayaṃ samupajānanhi paurajānapadakriyāḥsa sukhaṃ modate bhūpa iha loke paratra caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें