महाभारत 12.137.18
इच्छयैव कृतं पापं सद्य एवोपसर्पतिकृतप्रतिक्रियं तेषां न नश्यति शुभाशुभम्
icchayaiva kṛtaṃ pāpaṃ sadya evopasarpatikṛtapratikriyaṃ teṣāṃ na naśyati śubhāśubham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें