महाभारत 12.137.27अन्योन्यकृतवैराणां न संधिरुपपद्यतेस च हेतुरतिक्रान्तो यदर्थमहमावसम्anyonyakṛtavairāṇāṃ na saṃdhirupapadyatesa ca heturatikrānto yadarthamahamāvasamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें