महाभारत 12.137.43
सत्कृतस्यार्थमानाभ्यां स्यात्तु पूर्वापकारिणःनैव शान्तिर्न विश्वासः कर्म त्रासयते बलात्
satkṛtasyārthamānābhyāṃ syāttu pūrvāpakāriṇaḥnaiva śāntirna viśvāsaḥ karma trāsayate balāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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